मैं शोक सभा में गाता हूँ…

अपनी छोटी सी दुनिया छोड़ भक्ति में जो रम जाता हूँ

मैं शोक सभा में गाता हूँ |

जहाँ भी जाता हूँ, ग़म का माहौल सजाता हूँ

मैं शोक सभा में गाता हूँ |

कहीं पर लोगों की अथाह भीड़, कहीं खाली कुर्सियां पाता हूँ

मैं शोक सभा में गाता हूँ |

आंखों पर अश्र, मन में स्मृतियाँ कई जगाता हूँ,

मैं शोक सभा में गाता हूँ |

कभी-कभी तो खुद भी यादों में खो जाता हूँ,

मैं शोक सभा में गाता हूँ |

हर तरह के किरदार से कुछ ही पल में वाकिफ़ हो जाता हूँ,

मैं शोक सभा में गाता हूँ |

किसी को घड़ी, किसी को मोबाइल, किसी को इधर उधर देखते हुए पाता हूँ

मैं शोक सभा में गाता हूँ |

किसी के अधूरे रह गए अरमानों पर सोचते-गाते, अपने अरमानों की ओर भी मुड़ जाता हूँ

मैं शोक सभा में गाता हूँ |

अनेकों बार वही मंज़र देखा, फिर भी हर बार वैसे ही खुद को बेचैन पाता हूँ…

फ़िल्मों में गाने इस शहर आया था कभी, अब मैं शोक सभा में गाता हूँ…

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